दशाश्वमेघ थाना प्रभारी लाइन हाजिर: काशी की प्रसिद्ध गंगा आरती के दौरान संदिग्ध गतिविधि और एक महिला से छेड़छाड़ के आरोप के मामले में दशाश्वमेघ थाने के प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र कुमार को लाइन हाजिर कर दिया गया है। वाराणसी पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने यह कार्रवाई कर्तव्य के प्रति उदासीनता और लापरवाही के आधार पर की है।
गंगा आरती स्थल पर संदिग्ध गतिविधि
घटना के अनुसार, एक युवक गंगा आरती के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में बार-बार स्थल के आसपास घूमता पाया गया। उस पर एक महिला को गलत नियत से छूने का आरोप भी लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला से छेड़छाड़ के बाद कुछ अज्ञात लोगों ने युवक की पिटाई कर दी।
घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश
इस घटना के बाद कुछ तथाकथित मीडिया कर्मियों और राजनीतिक नेताओं ने इसे हिंदू-मुस्लिम रंग देने की कोशिश की। कुछ लोगों ने इसे पहलगाम हमले से जोड़ते हुए भगवाधारी युवकों द्वारा मुस्लिम युवक की पिटाई का रूप देने का प्रयास किया, जबकि प्रारंभिक पुलिस जांच में ऐसी कोई सांप्रदायिक मंशा सामने नहीं आई है।
प्रारंभिक जांच में क्या निकला सामने?
पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया कि युवक कई दिनों से आरती स्थल पर अनावश्यक रूप से घूम रहा था। पूछताछ में युवक ने यह स्वीकार किया कि वह गलती से महिला से टकरा गया था। युवक की पहचान पड़ाव क्षेत्र निवासी के रूप में हुई है।
एटीएस कर रही विस्तृत जांच
चूंकि मामला संवेदनशील है और हाल ही में पहलगाम जैसी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस को विशेष सतर्कता के निर्देश दिए गए थे, इसलिए अब इस मामले की जांच एटीएस को सौंपी गई है। विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि युवक का आरती स्थल पर लगातार घूमने का उद्देश्य क्या था।
प्रभारी निरीक्षक की लापरवाही बनी कार्रवाई की वजह
उच्चाधिकारियों द्वारा बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद दशाश्वमेघ थाना क्षेत्र में इस प्रकार की घटना होना सुरक्षा व्यवस्था में चूक को दर्शाता है। धार्मिक स्थलों पर संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान और निगरानी की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस की होती है, लेकिन इस दिशा में लापरवाही के चलते प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया गया।
यह घटना बताती है कि संवेदनशील स्थलों पर पुलिस की सतर्कता कितनी आवश्यक है। साथ ही मीडिया और राजनीतिक वर्ग को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए कि बिना पुष्टि के किसी भी घटना को सांप्रदायिक रंग देने से समाज में तनाव फैल सकता है।
रिपोर्ट: सुजीत सिंह
Author: Suryodaya Samachar
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