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भगवान् हमसे क्या अपेक्षा करते हैं, ऐसा करेंगे तो भगवान् साक्षात दर्शन देंगे..

प्रभु को अपने घर बुलाने की गाँठ लगाकर तो देखिये

सबको सिर्फ अपनी-अपनी पड़ी है, भगवान् से तो किसी को कोई मतलब ही नहीं है । सब भगवान् से चाहते हैं , पर भगवान् को कोई नहीं चाहता ! क्या कभी किसी ने भगवान् को घर बुलाने की गाँठ लगायी है कि हे प्रभु !हम आप के दरबार में गाँठ लगा कर जा रहे हैं। आपको शपथ देते है कि आपको भी हमारे घर आना ही होगा, हमारा चित्त अपने चरणों में लगाना ही होगा, हमें आपसे प्रेम हो जाये ऐसा जादू चलाना ही होगा…..

सच में, हम सब आज दुर्योधन जैसे बन गए है, कभी अर्जुन जैसे बनकर तो देखें । प्रभु को अपने घर बुलाने की गाँठ लगाकर तो देखिये…. तो भगवान् को हर कदम आप अपने साथ पाएंगे….,

भगवान् कहते है कि दुःख और सुख तो जीवन में धूप-छांव की तरह है, पर जो निरंतर मुझे भजता है, जो मेरा ही स्मरण करता है, उसे दुःख कभी भी दु:खी नहीं करता क्योंकि दुःख में मैं अपने भक्त को अपनी गोदी में बैठा लेता हूं …….

पांडवो जैसा तो दुःख शायद किसी को नहीं पड़ा होगा, परन्तु भगवान् श्रीकृष्ण के साथ रहने के कारण उन्हें दुःख कभी दुखी नहीं कर पाया और ना ही उन्होंने कभी पीड़ा महसूस की …. अपितु सब कुछ होते हुए भी दु:खी तो कौरव ही रहे थे – ये हम सब जानते हैं।

भगवान् की जीवों से अपेक्षा

पुष्टि मार्ग में ठाकुरजी जीवात्मा से एक ही बात की अपेक्षा रखते हैं कि *तुम मेरे बनकर रहो, मुझमें दृढ विश्वास रखो, दीनतापूर्वक सर्वस्व समर्पण करके पूर्णतः निश्चित हो जावो, बाकी सब मैं सम्हाल लूंगा*

‘नवरत्न’ ग्रन्थ में श्रीवल्लभाचार्यजी ने बताया है कि जो जीव प्रभु को आत्मसमर्पण कर देता है, उसके मन में यह दृढ विश्वास जाग जाना चाहिए कि प्रभु सब निज – इच्छा से ही करेंगें। जो अपने प्राणों को कृष्णमय बना लेते हैं, उनके जीवन में चिन्ता का प्रवेश कैसे हो सकता है? वे हर स्थिति को प्रभु की लीला मानते हुए निरर्थक चिन्ताओं में समय न खोकर और प्रभु के प्रति तन्मयता न छोडकर निरन्तर ‘श्रीकृष्णःशरणं मम’ बोलते हुए जीवन जीते हैं। उनके जीवन में भगवत प्रेम व्यसन बन जाता है, फलात्मक हो जाता है।

🙏

यह भी पढ़ें : जब आप भगवान् का ध्यान करते हैं तो भगवान् भी आपका ध्यान करते हैं, श्रीमद्भगवत पुराण का ये प्रसंग…

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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