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Varanasi News :- आईआईटी (बीएचयू) को पूर्व छात्र देव गोस्वामी से ₹13 करोड़ का ऐतिहासिक दान

Varanasi News :- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू), वाराणसी ने अपने गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है। यांत्रिक अभियंत्रण विभाग के 1974 बैच के पूर्व छात्र और विश्वविख्यात उद्यमी श्री देव गोस्वामी ने संस्थान को 1.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹13 करोड़) का ऐतिहासिक दान प्रदान किया है। यह दान संस्थान के नवनिर्मित “देव एवं वर्धना गोस्वामी लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स” के निर्माण हेतु दिया गया है।

शैक्षणिक अवसंरचना को मिलेगा नया विस्तार

इस अत्याधुनिक लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन सोमवार को श्री देव गोस्वामी एवं उनकी पत्नी डॉ. वर्धना गोस्वामी ने स्वयं किया। यह तीन मंजिला भवन 1,850 छात्रों की क्षमता के साथ स्मार्ट बोर्ड, हाई-स्पीड वाई-फाई, ग्रुप स्टडी एरिया, ध्वनि अनुकूलन (अकौस्टिक ट्रीटमेंट), एर्गोनोमिक सीटिंग और समावेशी डिज़ाइन जैसी सुविधाओं से सुसज्जित है।

यह परिसर न केवल छात्रों के लिए आधुनिक शिक्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि संवाद, सहयोग और नवाचार को भी बढ़ावा देगा।

पूर्व छात्र के योगदान से शिक्षा को नई दिशा

श्री गोस्वामी, अमेरिका स्थित वैश्विक इंजीनियरिंग कंपनी IPS (इंटिग्रेटेड प्रोजेक्ट सर्विसेज) के चेयरमैन एवं सीईओ हैं, और उनकी कंपनी ने कोविड-19 वैक्सीन उत्पादन हेतु फाइज़र, मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन की निर्माण सुविधाओं में अहम भूमिका निभाई थी।

उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा,

> “मेरी कल्पना है कि यह कॉम्प्लेक्स अधिगम और नेतृत्व विकास का केंद्र बनेगा, जो छात्रों को वैश्विक स्तर पर परिवर्तन लाने के लिए तैयार करेगा।”

संस्थान की ओर से गहरी सराहना

आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने इस अभूतपूर्व योगदान के लिए गहरा आभार प्रकट करते हुए कहा:

> “यह दान न केवल एक शैक्षणिक भवन का निर्माण है, बल्कि एक प्रेरणा है—’गिविंग बैक’ की भावना का जीवंत उदाहरण। श्री गोस्वामी का यह सहयोग संस्थान के लिए एक अमूल्य विरासत है।”

 

10 मिलियन डॉलर के क्लब में पहुंचा आईआईटी (बीएचयू) फाउंडेशन

इस ऐतिहासिक दान के साथ ही संस्थान का कुल दान 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है, जो पूर्व छात्रों की संस्थान के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।

संसाधन एवं पूर्व छात्र मामलों के डीन, प्रो. हीरालाल प्रमाणिक ने कहा कि,

> “यह केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गुणवत्ता शिक्षा का एक दीपस्तंभ है।”

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Author: Suryodaya Samachar

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