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Varanasi news :- वाराणसी-प्रयागराज हाईवे पर ट्रक हादसे में खलासी की दर्दनाक मौत

Varanasi news :- [रिपोर्टर अजय कुमार गुप्ता] वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र में सोमवार को एक हृदयविदारक हादसे में ट्रक के खलासी की जान चली गई। यह घटना तब घटी जब खलासी बबलू यादव, अपने चालक के साथ ट्रक के ऊपर चढ़कर भीगे हुए त्रिपाल को ठीक कर रहा था। बबलू यादव का संतुलन बिगड़ गया, और वह 13 फीट की ऊँचाई से सड़क पर सिर के बल गिर पड़ा, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना न केवल परिवार के लिए बल्कि उन सभी लोगों के लिए दर्दनाक है, जो त्योहारों के समय पर अपनों के साथ सुरक्षित रहने की उम्मीद करते हैं।



घटना का विवरण

बाराबंकी जिले से आलू के बोरे लादकर ट्रक वाराणसी-प्रयागराज हाईवे से होते हुए सासाराम जा रहा था। ट्रक का चालक महेंद्र यादव और खलासी बबलू यादव मिलकर इस सफर पर निकले थे। लेकिन रास्ते में अचानक मौसम खराब हो गया और बारिश होने लगी। बारिश के कारण ट्रक पर लगा त्रिपाल भीग गया था, जिससे आलू की बोरियों के भीगने और खराब होने का खतरा था। इसे रोकने के लिए महेंद्र यादव ने ट्रक को रोहनिया स्थित एसएमएस कॉलेज के पास खड़ा कर दिया और खलासी बबलू के साथ मिलकर त्रिपाल ठीक करने का प्रयास किया।

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बबलू ने ट्रक पर चढ़कर त्रिपाल को ठीक करने के लिए रस्सी खींचना शुरू किया। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर गया। सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद चालक महेंद्र यादव ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुँची, शव को अपने कब्जे में लिया, और कानूनी प्रक्रिया के तहत पंचनामा भरने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

मृतक के परिवार को सदमा

बबलू यादव सुल्तानपुर जनपद के कादीपुर थाना क्षेत्र के पाकड़पुर गांव का रहने वाला था। वह अंबेडकर नगर स्थित एक ट्रक में खलासी का काम करता था। दीपावली से कुछ दिन पहले ही वह अपने घर वालों से मिलने गया था और वहां से बाराबंकी आलू का लोड लेकर सासाराम के लिए निकला था। बबलू ने अपने परिवार को वादा किया था कि वह दीपावली पर घर लौटेगा और परिवार के साथ यह त्यौहार मनाएगा। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इस हादसे की खबर सुनते ही बबलू के परिवार में मातम छा गया। परिजनों ने जल्द ही वाराणसी पहुँचकर शव को देखा और शोक में डूब गए।

त्योहार के समय इस तरह की घटनाएँ

त्योहारों का समय परिवार के साथ मनाने का होता है, और ऐसे में हर कोई चाहता है कि वह अपनों के पास रहे। बबलू ने भी यही सोचा था और घर लौटने की तैयारी में था, लेकिन दुर्घटना ने उसके परिवार की खुशियाँ छीन लीं। इस प्रकार की घटनाएँ न केवल परिवार को प्रभावित करती हैं, बल्कि यह समाज को भी झकझोर देती हैं। यह हादसा एक चेतावनी है कि किसी भी प्रकार के जोखिम वाले कार्यों में सुरक्षा का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।

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ट्रक ड्राइवर और खलासी की कठिनाईयाँ

भारत में ट्रक ड्राइवर और खलासी जैसे पेशे से जुड़े लोग अपनी जीविका के लिए लंबी दूरी तय करते हैं। वे न केवल विभिन्न मौसमों का सामना करते हैं, बल्कि कई बार अपनी जान को भी खतरे में डालते हैं। इस घटना में भी यह देखा गया कि बारिश में भीगने से आलू की बोरियाँ खराब न हो जाएँ, इस चिंता में चालक और खलासी ने स्वयं को खतरे में डाल दिया। अक्सर काम के दौरान ये लोग अपनी सुरक्षा पर ध्यान नहीं दे पाते और दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं।

खलासी और ड्राइवरों के लिए सुरक्षा मानकों का होना बहुत ज़रूरी है। अगर ट्रक में उचित व्यवस्था होती, तो शायद यह दुर्घटना टल सकती थी। त्रिपाल लगाने और सामान को सुरक्षित रखने के काम में हमेशा उचित उपकरण और सहायता का होना आवश्यक है, ताकि किसी भी अनहोनी को रोका जा सके।

प्रशासन की भूमिका और आवश्यक सुधार

हादसे के बाद पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए घटना की पूरी जानकारी ली और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन की ओर से ट्रक ड्राइवरों और खलासी के लिए सुरक्षा मानकों पर ध्यान दिया जाता है? क्या उन्हें उनके काम के लिए आवश्यक सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं? प्रशासन और ट्रांसपोर्ट कंपनियों को चाहिए कि वे इन श्रमिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और उन्हें सुरक्षा प्रशिक्षण के साथ-साथ आवश्यक उपकरण भी प्रदान करें।

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Author: Suryodaya Samachar

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