Sonbhadra news (करमा सोनभद्र डेस्क):- स्थानीय थाना अन्तर्गत हवाओं के साथ हो रही लगातार मूसलाधार बरसात से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। करमा थाना क्षेत्र के बेलन नदी उफान पर हैं ।बेलन नदी लगातार बढ़ रहे पानी से कई गांव, बारी महेवा, कसया कला, कसया खुर्द, करकी, यमशोखर, रानीतारा, मोकरसिम, उसका दाई, कमहरिया, कतवरिया, किंगरी आदि दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
किसानों का धान बाढ़ के चपेट आ जाने से किसानो मे अफरा तफरी मची है। मूसलाधार बरसात और तेज हवा के कहर से सड़क सहित घरों पर दर्जनों पेड़ गिरने से अफरा तफरी मची रही है। कई जगह बिजली के पोल टूट गए तार जमींदोज हो गए। सैकड़ों गाँवों में बिजली पहले से प्रभावित चल रही है। बिजली के अभाव में घोरावल,रानीतार उप फिटर से क्षेत्र की लगभग एक लाख आवादी अंधेरे में गुजर कर रही है। हवा और पानी के कहर से ग्रामीण इलाके में कई जगह कच्चा घर गिरने से कई लोग बेघर हो गए। बिजली कब तक बहाल होगी इस पर विभागीय अधिकारी संसय में हैं।
कहा जा रहा है कि बारिश और हवा का यही हाल रहा तो कई दिनों तक बिजली के दर्शन मुश्किल हैं। तेज बारिश और हवा से जनजीवन अस्त ब्यस्त हो गया है। लोग घरों में कैद हैं। जरूरी काम धंधा वाले लोग ही बाहर निकल रहे हैं। लगातार हो रही बारिश में विश्वकर्मा पूजा प्रभावित हुआ तो कही कहीं लोग केवल औपचारिकता पूरी करने में लगे रहे।
मूसलाधार बारिश के कारण कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो जाता है। नदियों के उफान पर आने से बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है, जिससे सैकड़ों गांवों में बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है और जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। ऐसी स्थिति में निम्नलिखित समस्याएं आमतौर पर देखने को मिलती हैं:-
1.बाढ़ का खतरा: नदियों का जलस्तर बढ़ने से तटीय और निचले क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इससे गांवों में पानी भरने लगता है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है।
2. बिजली गुल होना: लगातार बारिश और बाढ़ के कारण बिजली के खंभों और तारों को नुकसान पहुंचता है, जिससे कई गांवों में बिजली आपूर्ति बंद हो जाती है। इससे जनजीवन और भी अधिक प्रभावित होता है, खासकर संचार और दैनिक जीवन की सुविधाओं में रुकावट आती है।
3.सड़क और यातायात प्रभावित :- बारिश के कारण सड़कें जलमग्न हो जाती हैं और यातायात बाधित हो जाता है, जिससे लोगों का आना-जाना मुश्किल हो जाता है। कई जगहों पर सड़कें क्षतिग्रस्त भी हो सकती हैं।
4. खेतों और फसलों को नुकसान :- मूसलाधार बारिश और बाढ़ से खेतों में पानी भर जाता है, जिससे फसलें खराब हो जाती हैं। किसानों को इस वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
5. राहत और बचाव कार्य :- ऐसे समय में प्रशासन और राहत एजेंसियों द्वारा बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और आवश्यक सुविधाएं (खाद्य सामग्री, पानी, दवाइयां) उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाते हैं।
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Author: Suryodaya Samachar
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