Sonbhadra news :- [रिपोर्टर रामेश्वर सोनी] उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में स्थित शाहगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक दर्दनाक घटना घटी है। यह घटना 31 अक्टूबर और 1 नवंबर 2024 के बीच की है जब जयप्रकाश पाल ने अपने पिता की हत्या का आरोप सुक्खन बैगा पर लगाया है। यह मामला दो लोगों के बीच जंगल में पशु चराई के विवाद से जुड़ा है जो बाद में हिंसक रूप धारण कर गया और इस विवाद ने एक व्यक्ति की जान ले ली। इस घटना ने स्थानीय लोगों के बीच हलचल मचा दी है और पुलिस द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
घटना का विवरण
जयप्रकाश पाल, जो कि शाहगंज थाना क्षेत्र के राजपुर गाँव का निवासी है, ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि उसके पिता बनवारी पाल, उम्र 60 वर्ष, 31 अक्टूबर 2024 को महुअरिया जंगल में अपनी भैंसें चराने गए थे। वहाँ उनकी मुलाकात वन विभाग के देखभालकर्ता सुक्खन बैगा से हुई, जिसने उनके पिता को जंगल में भैंसें चराने से मना किया। सुक्खन बैगा ने आरोप लगाया कि बनवारी पाल द्वारा भैंसों को जंगल में ले जाने से वनस्पति को नुकसान पहुँचता है, जिससे वन क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। इसी मुद्दे को लेकर दोनों के बीच कहासुनी और विवाद हुआ, परन्तु बात उसी समय शांत हो गई।
1 नवंबर 2024: घटना का दिन
अगले दिन यानी 1 नवंबर को बनवारी पाल एक बार फिर भैंसें लेकर उसी जंगल में पहुँचे। इस पर सुक्खन बैगा ने एक बार फिर उन्हें मना किया, और इसी बात को लेकर दोनों के बीच फिर से विवाद छिड़ गया। इस बार विवाद ने गंभीर रूप ले लिया और सुक्खन बैगा ने कथित रूप से अपने हाथ में तीर लेकर बनवारी पाल पर हमला कर दिया। तीर से हमला होने के कारण बनवारी पाल गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलने पर शाहगंज पुलिस मौके पर पहुँची और दोनों को अस्पताल पहुँचाया, परंतु अस्पताल पहुँचने के दौरान ही बनवारी पाल की मृत्यु हो गई। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया, जबकि सुक्खन बैगा भी इस घटना में घायल हो गया और उसे बेहतर इलाज के लिए ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया है।
पुलिस की कार्यवाही
बनवारी पाल के बेटे जयप्रकाश पाल ने इस घटना की पूरी जानकारी देते हुए शाहगंज थाने में सुक्खन बैगा के खिलाफ तहरीर दी। जयप्रकाश के बयान के अनुसार, यह हत्या पूर्वनियोजित हो सकती है, क्योंकि सुक्खन ने पहले भी उसके पिता को जंगल में भैंसें चराने से रोका था और इस बार विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने जानलेवा हमला कर दिया। इस तहरीर के आधार पर शाहगंज पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और मु.अ.स. 83/24, धारा 115(2), 105 BNS के तहत कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है।
पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, सुक्खन बैगा पर हत्या का आरोप लगाया गया है और इस घटना की गहराई से जांच की जा रही है। साथ ही पुलिस ने यह भी बताया कि मामले में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए क्षेत्र में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है और स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
घटना के कारणों पर चर्चा
यह घटना इस बात का संकेत है कि वन क्षेत्रों में पशुओं की चराई को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच किस तरह के तनाव उत्पन्न हो सकते हैं। जंगल में पशुओं को चराने से वन क्षेत्र की वनस्पतियों और जैव-विविधता को नुकसान पहुँचता है, जिसके चलते वन विभाग इस पर सख्ती से नजर रखता है। लेकिन दूसरी ओर, ग्रामीणों के लिए यह वन क्षेत्र उनके पशुओं के चारागाह का एक प्रमुख स्रोत होता है। ऐसे में जब वन विभाग या उसके कर्मी ग्रामीणों को इस तरह की गतिविधियों से रोकते हैं, तो विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
बनवारी पाल और सुक्खन बैगा के बीच हुआ यह विवाद भी इसी समस्या का परिणाम माना जा सकता है। हालांकि, कानून व्यवस्था को हाथ में लेना कभी भी समस्या का समाधान नहीं होता और इस तरह की घटनाएँ समाज में अव्यवस्था फैलाती हैं।
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पोस्टमार्टम और आगे की कार्यवाही
बनवारी पाल के शव का पोस्टमार्टम करवाया गया है, और पुलिस द्वारा इस रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है ताकि मौत के सटीक कारणों का पता चल सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि किस प्रकार से हमला किया गया और इससे पुलिस को मामले की तह तक जाने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, पुलिस ने सुक्खन बैगा से भी पूछताछ की योजना बनाई है ताकि घटना की सही परिस्थितियाँ उजागर हो सकें।
सामाजिक दृष्टिकोण
इस घटना ने पूरे गाँव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर फैला दी है। ग्रामीणों में डर और चिंता का माहौल है, क्योंकि ऐसे मामले से सामाजिक ताने-बाने पर भी असर पड़ता है। इस तरह की घटनाएँ गाँवों में आपसी सौहार्द और सह-अस्तित्व की भावना को प्रभावित करती हैं। इस मामले में दोनों पक्षों के बीच वर्षों से चला आ रहा एक पारंपरिक विवाद था, जो अब एक दुखद मोड़ ले चुका है।
ग्रामीण क्षेत्रों में वन विभाग और ग्रामीणों के बीच बेहतर संवाद और समझ के लिए सरकारी स्तर पर कदम उठाए जाने की आवश्यकता है ताकि इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके। वन क्षेत्रों की देखभाल करना आवश्यक है, परंतु ग्रामीणों की आजीविका और परंपराओं का भी सम्मान होना चाहिए।
इस दुखद घटना के बाद अब सभी की नजरें इस पर हैं कि न्याय प्रणाली और पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाती हैं। क्षेत्रीय समाज के लिए यह घटना एक बड़ी सीख भी है कि किसी भी विवाद को हिंसा में परिवर्तित करने से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि स्थानीय प्रशासन और वन विभाग, गाँव वालों के बीच बेहतर संबंधों को बनाने के लिए आगे आएं, जिससे वन क्षेत्रों का संरक्षण भी हो सके और ग्रामीणों के आजीविका साधनों पर भी कोई विपरीत असर न पड़े।

Author: Suryodaya Samachar
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