मिर्जापुर Dream 11 विनर :- [ ब्यूरो चीफ तारा त्रिपाठी की रिपोर्ट] उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के पटेहरा कला ब्लॉक के डढ़िया मलुवा गांव के निवासी दयाराम के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है। एक अधिवक्ता के मुंशी के रूप में काम करने वाले दयाराम अचानक करोड़पति बन गए हैं। उन्होंने ड्रीम 11 पर टीम बनाकर तीन करोड़ रुपये का इनाम जीता, जिससे उनका नाम पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।
कैसे बने करोड़पति?
दयाराम को क्रिकेट में गहरी रुचि थी और वह फैंटेसी क्रिकेट के बारे में अच्छी समझ रखते थे। उन्होंने अपने बेटे के नाम से ड्रीम 11 पर एक आईडी बनाई और नियमित रूप से इसमें भाग लेते रहे। लेकिन किस्मत ने उनका साथ दिया जब उन्होंने लखनऊ सुपर जायंट्स और पंजाब किंग्स के बीच हुए मैच में एक बेहतरीन टीम बनाई। उनकी चुनी गई टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और अंततः उन्हें तीन करोड़ रुपये का इनाम दिलाया।
जीत से आया बड़ा बदलाव
दयाराम की यह जीत उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। सरकार द्वारा टैक्स काटने के बाद उन्हें लगभग 2 करोड़ 10 लाख रुपये प्राप्त हुए। यह रकम उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी, क्योंकि वह अब तक एक सामान्य जीवन जी रहे थे और रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए मेहनत कर रहे थे।
अब जब दयाराम करोड़पति बन चुके हैं, तो उनके परिवार और गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है। लोग उन्हें बधाई देने के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं और उनकी यह सफलता पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है।
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गांव में खुशी की लहर
दयाराम की इस अप्रत्याशित जीत से उनका गांव भी उत्साह से भर गया है। उनके दोस्त, रिश्तेदार और परिचित लोग अब उन्हें प्रेरणा की तरह देख रहे हैं। गांव में कई लोगों ने इस जीत को किस्मत और मेहनत का मिला-जुला परिणाम बताया।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि “दयाराम हमेशा ईमानदारी से काम करता था, और शायद उसकी मेहनत का ही फल है कि वह आज करोड़पति बन गया है।” वहीं, युवाओं के लिए यह एक नई प्रेरणा बन गई है कि वे भी अपनी समझदारी और सूझबूझ से किस्मत बदल सकते हैं।
अब क्या करेंगे दयाराम?
दयाराम ने बताया कि वह अपनी इस जीत का इस्तेमाल समझदारी से करेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस पैसे का सही उपयोग करना चाहते हैं ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रहे। वह अपने गांव में एक बड़ा मकान बनाने और अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा सुनिश्चित करने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा, वह जरूरतमंदों की मदद करने की भी इच्छा रखते हैं, ताकि उनकी सफलता का लाभ और लोगों को भी मिल सके।
फैंटेसी क्रिकेट: मौके और जोखिम दोनों
दयाराम की सफलता से जहां कई लोग प्रेरित हो रहे हैं, वहीं विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि फैंटेसी क्रिकेट में जीत की कोई गारंटी नहीं होती। यह खेल पूरी तरह से कौशल और किस्मत का मिश्रण है। अगर कोई इसमें भाग लेता है, तो उसे समझदारी और सतर्कता से खेलना चाहिए, क्योंकि इसमें हार का जोखिम भी उतना ही अधिक है।
दयाराम की कहानी बनी मिसाल
दयाराम की यह कहानी यह साबित करती है कि किस्मत कभी भी किसी का भी साथ दे सकती है, लेकिन मेहनत और सूझबूझ से किया गया काम ही असली सफलता दिलाता है। आज दयाराम करोड़पति हैं, लेकिन उनकी विनम्रता और सादगी अभी भी वैसी ही बनी हुई है। वह अपनी इस सफलता का उपयोग न केवल खुद के बल्कि अपने गांव और समाज के भले के लिए करना चाहते हैं।

Author: Suryodaya Samachar
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