Kinnar community Varanasi :- किन्नर समाज भारतीय समाज का एक अभिन्न हिस्सा रहा है, जिसे सदियों से विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते देखा गया है। फिर भी, इस समाज के लोग, जिन्हें हम किन्नर या हिजड़ा समाज के नाम से जानते हैं, मुख्यधारा से अक्सर कटे हुए पाए जाते हैं। उनकी विशिष्ट पहचान, पारंपरिक भूमिकाओं, और सामाजिक सीमाओं के बावजूद, वे सामान्य जीवन जीने के हकदार हैं। इसके बावजूद, उन्हें समाज में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें से सबसे प्रमुख है – उन्हें सामाजिक, आर्थिक और कानूनी रूप से समानता और सम्मान का अभाव। वाराणसी की किन्नर समाज की अध्यक्षा सलमा चौधरी द्वारा हाल ही में उठाया गया मुद्दा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो किन्नर समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।
Kinnar community Varanasi समाज में किन्नर समुदाय की स्थिति
भारतीय समाज में किन्नर समुदाय को लंबे समय से हाशिए पर रखा गया है। भले ही धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों में उनका उल्लेख सम्मान के साथ किया जाता हो, लेकिन उनके लिए सामाजिक और आर्थिक समानता की कमी अभी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। किन्नर समुदाय को समाज में अक्सर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। न केवल उन्हें रोजगार के अवसरों से वंचित रखा जाता है, बल्कि उन्हें घर किराए पर लेने जैसी सामान्य चीज़ों के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस समाज के लोग अपनी आजीविका के लिए ज्यादातर पारंपरिक तरीकों, जैसे बधाई मांगना, नाचना-गाना, या भीख मांगने पर निर्भर होते हैं।
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वर्तमान में किन्नर समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कुछ सरकारी प्रयास हुए हैं, जैसे ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 2019, लेकिन इस कानून के बावजूद जमीनी स्तर पर बहुत कुछ बदलता हुआ दिखाई नहीं देता है। सरकार द्वारा योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन उनका कार्यान्वयन और प्रभाव सीमित ही रहा है। इसी संदर्भ में सलमा चौधरी का प्रयास किन्नर समाज के लिए न्याय की मांग और उनके अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक आवाज बनकर उभरा है।
Kinnar community Varanasi किन्नरों के लिए आवास समस्या: सलमा चौधरी की मांग
वाराणसी की किन्नर समाज की अध्यक्षा सलमा चौधरी ने हाल ही में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) से मिलकर किन्नर समाज की एक बड़ी समस्या को उठाया। उन्होंने कहा कि किन्नरों को वाराणसी में मकान किराए पर लेना बहुत मुश्किल हो जाता है। इस वजह से, उन्होंने मांग की कि कांशीराम आवास योजना के तहत खाली पड़े घरों को किन्नरों के लिए आवंटित किया जाए। कांशीराम आवास योजना का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को किफायती और स्थायी आवास प्रदान करना है, और सलमा चौधरी ने उम्मीद की थी कि किन्नर समुदाय को भी इस योजना का लाभ मिल सकता है।
हालांकि, मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने यह कहकर इस अनुरोध को खारिज कर दिया कि कांशीराम आवास योजना के अंतर्गत जो घर आवंटित किए जाते हैं, उनका आरक्षण किन्नर समाज के लिए नहीं है। इस जवाब से सलमा चौधरी और किन्नर समाज के अन्य लोग निराश हो गए, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि उनकी इस बुनियादी जरूरत को पूरा करने में प्रशासन उनकी मदद करेगा।
Kinnar community Varanasi : शासन-प्रशासन से न्याय की गुहार
इस अस्वीकृति के बाद, सलमा चौधरी ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किन्नर समाज को भी एक गरिमामय और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए। यह केवल आवास का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह किन्नर समाज की समग्र सामाजिक और आर्थिक समानता की लड़ाई का प्रतीक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया कि वे किन्नर समाज की समस्याओं पर ध्यान दें और उन्हें भी समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए उचित कदम उठाएं।
सलमा चौधरी की यह अपील किन्नर समाज के अधिकारों और उनकी पहचान के लिए एक व्यापक मांग का हिस्सा है। आज जब देश के विभिन्न वर्गों और समुदायों के अधिकारों को लेकर गंभीर चर्चाएं हो रही हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि किन्नर समाज को भी इस चर्चा में सम्मिलित किया जाए। उनका यह संघर्ष केवल उनके लिए नहीं, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति के लिए है जो सामाजिक और आर्थिक समानता का अधिकार रखता है।
Kinnar community Varanasi : किन्नर समाज के लिए भविष्य की दिशा
सलमा चौधरी का यह प्रयास किन्नर समाज के लिए एक नई दिशा की ओर इशारा करता है। उनकी मांग केवल आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किन्नर समाज को मुख्यधारा में लाने और उन्हें समाज में समानता का अधिकार दिलाने की पहल है। इसके लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करने की जरूरत है।
सरकार को इस बात पर ध्यान देना होगा कि किन्नर समाज को भी अन्य कमजोर वर्गों की तरह अधिकार और सुविधाएं मिलें। उनके लिए रोजगार के अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं उपलब्ध करानी चाहिए। इसके साथ ही, समाज को भी किन्नर समाज के प्रति अपनी सोच बदलने की जरूरत है। हमें यह समझना होगा कि किन्नर समाज के लोग भी हमारे समाज का एक हिस्सा हैं और वे भी समान अधिकारों के हकदार हैं।
सलमा चौधरी और किन्नर समाज का यह संघर्ष न केवल उनके जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में है, बल्कि यह पूरे समाज को एक संदेश देने का प्रयास है। यह संदेश है कि हर व्यक्ति को समानता का अधिकार मिलना चाहिए, चाहे वह किसी भी पहचान, लिंग या जाति से हो। सलमा चौधरी ने अपनी आवाज उठाई है, और अब बारी है कि सरकार और समाज उस आवाज को सुने और किन्नर समाज के लिए उचित कदम उठाए।
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…….Reporter Sujeet Singh Varanasi

Author: Suryodaya Samachar
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