प्रयागराज (उत्तर प्रदेश):- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध हिरासत और “शांति भंग” के मामलों में पुलिस कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध कानूनी आधार के किसी भी व्यक्ति को हिरासत में रखना उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखा जाता है, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
फैसले में यह भी प्रावधान किया गया है कि अवैध हिरासत के मामलों में पीड़ित को मुआवजा दिया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक अवैध रूप से हिरासत में रखा जाता है, तो प्रति दिन के हिसाब से आर्थिक मुआवजे का प्रावधान रखा गया है, जबकि कुछ मामलों में निश्चित अवधि के लिए हिरासत पर अतिरिक्त मुआवजे की व्यवस्था भी बताई गई है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि “व्यक्तिगत स्वतंत्रता” संविधान के मूल अधिकारों में से एक है और इसे किसी भी स्थिति में अनदेखा नहीं किया जा सकता। पुलिस को गिरफ्तारी और हिरासत के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करना होगा।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर को निर्धारित समय सीमा के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आदेशों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय पुलिस प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि आदेश के पूर्ण विवरण और लागू होने की प्रक्रिया पर आगे की कानूनी व्याख्या और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्थिति और स्पष्ट होगी।
Author: Suryodaya Samachar
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