चैत्र नवरात्रि तीसरा दिन :- चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र स्थित होने के कारण ही इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली और तेजस्वी है। इनके दसों हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र हैं और इनकी मुद्रा युद्ध के लिए तत्पर रहने वाली है। इनकी कृपा से साधक को अदम्य साहस, निर्भयता और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप और महत्त्व
मां चंद्रघंटा का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है, जो शक्ति, ऊर्जा और साहस का प्रतीक है। इनकी आराधना करने से व्यक्ति के भीतर आत्मबल विकसित होता है और वह किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हो जाता है। मां चंद्रघंटा की उपासना तंत्र साधना में मणिपुर चक्र को जाग्रत करने के लिए भी की जाती है।
मां चंद्रघंटा की कृपा से मिलने वाले लाभ
- हर प्रकार के भय, शत्रु और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है।
- आत्मविश्वास और पराक्रम में वृद्धि होती है।
- कुंडली में मंगल ग्रह से जुड़े दोष शांत होते हैं।
- मानसिक शांति और आंतरिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
मां चंद्रघंटा का भोग
मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बने पकवान अर्पित करने का विशेष महत्व है। ऐसा करने से साधक को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
PM Modi New Private Secretary :- जाने कौन है निधि तिवारी पीएम मोदी की नई निजी सचिव
मां चंद्रघंटा की पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ लाल वस्त्र धारण करें।
- घर या मंदिर में मां चंद्रघंटा की प्रतिमा स्थापित करें।
- मां को लाल फूल, रक्त चंदन और लाल चुनरी अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाएं और माता के मंत्रों का जाप करें।
- मां को दूध, मिष्ठान और पंचामृत का भोग लगाएं।
- माता की आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें।
मां चंद्रघंटा का विशेष मंत्र
“ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः।”
इस मंत्र का 108 बार जप करने से मानसिक बल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
मंगल दोष से मुक्ति के उपाय
यदि किसी की कुंडली में मंगल दोष हो, तो मां चंद्रघंटा की उपासना अत्यंत प्रभावी होती है।
- लाल रंग के वस्त्र धारण करें।
- मां को तांबे का सिक्का या ताम्र धातु की वस्तु अर्पित करें।
- हलवा या मेवे का भोग लगाएं।
- “ॐ अं अंगारकाय नमः” मंत्र का जप करें।
- पूजा के उपरांत मां को चढ़ाया गया तांबे का सिक्का अपने पास रखें।
मां चंद्रघंटा की पूजा नवरात्रि के तीसरे दिन विशेष रूप से की जाती है। इनकी आराधना से साधक को साहस, आत्मविश्वास और भयमुक्त जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मंगल दोष को शांत करने और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए यह पूजा अत्यंत फलदायी होती है।

Author: Suryodaya Samachar
खबर से पहले आप तक



