Almoda Bus Accident :- उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के सल्ट विकासखंड के मरचूला में एक भीषण बस हादसे में 36 लोगों की जान चली गई, जबकि 27 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह दुर्घटना तब हुई जब पौड़ी गढ़वाल से आ रही एक यात्रियों से भरी बस अनियंत्रित होकर लगभग 150 फीट गहरी खाई में गिर गई। हादसे के बाद परिवहन मुख्यालय द्वारा एक जांच दल का गठन किया गया है, जो दुर्घटना के कारणों की गहराई से पड़ताल कर रहा है।
हादसे के संभावित कारण:
इस हादसे के पीछे पांच प्रमुख संभावित कारण सामने आए हैं:
1. ओवरलोडिंग – बस में निर्धारित संख्या से अधिक सवारियां थीं, जिससे वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है।
2. कमानी टूटना – बताया जा रहा है कि बस की कमानी टूट गई थी, जिससे नियंत्रण में समस्या आ सकती है।
3. सड़क की खराब स्थिति – संकरी और गड्ढों वाली सड़क भी दुर्घटना का कारण हो सकती है।
4. क्रैश बैरियर की कमी – दुर्घटना स्थल पर क्रैश बैरियर नहीं थे, जो हादसे के समय सुरक्षा प्रदान कर सकते थे।
5. वाहनों की कम उपलब्धता – त्योहार के कारण यात्रियों की संख्या अधिक थी, जबकि वाहनों की कमी थी, जिससे ओवरलोडिंग की समस्या उत्पन्न हुई।
सुरक्षा इंतजामों की पोल:
यह हादसा सड़क सुरक्षा के इंतजामों की गंभीर कमी को भी उजागर करता है। लोक निर्माण विभाग को सड़क पर क्रैश बैरियर लगाने के लिए दो साल पहले सात करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद काम नहीं किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही, सीएम के निर्देश पर दो प्रभारी एआरटीओ को भी निलंबित कर दिया गया है।
जांच और कार्रवाई:
उप परिवहन आयुक्त राजीव मेहरा की अध्यक्षता में गठित जांच दल ने प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत कर प्राथमिक जानकारी जुटाई है और सभी संभावित कारणों की गहनता से जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि इस तरह के हादसे भविष्य में न हो, इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं।
अल्मोड़ा के मरचूला में कूपी बैंड के पास हुए बस हादसे ने 36 लोगों की जान ले ली, जबकि 27 लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका उपचार विभिन्न अस्पतालों में जारी है। यह सफर उन यात्रियों के लिए आखिरी साबित हुआ, जिनकी जान इस भयानक हादसे में चली गई, जबकि कई बचे लोगों को जीवनभर के लिए गहरे जख्म मिल गए हैं। रामनगर के अस्पताल में भी कई घायलों का इलाज चल रहा है।
जब सुबह कुछ घायलों को होश आया तो उन्होंने खुद को अस्पताल के बिस्तर पर पाया, जहां उनके मानसिक और शारीरिक घावों का उपचार किया जा रहा है। ईटीवी भारत ने इन घायलों से बात की और इस हादसे के भयावह मंजर को समझा। घायलों ने बताया कि यह हादसा उनकी जिंदगी में ऐसा खौफनाक पल है, जिसे वो कभी भुला नहीं पाएंगे।
हादसे में फंसे घायलों ने बताया मंजर
हादसे से उबर रहे घायलों ने बताया कि सफर के दौरान सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अचानक से बस अनियंत्रित हो गई और देखते ही देखते खाई में गिर गई। दुर्घटना का झटका इतना तेज था कि कुछ ही पलों में हर तरफ चीख-पुकार मच गई। कई यात्री दर्द से कराह रहे थे, कुछ लोग बेहोश थे और कुछ की जान जा चुकी थी।
घायलों ने यह भी बताया कि हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग उनकी मदद के लिए वहां पहुंचे। बचाव दल और प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई की और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया। हालांकि, उस भयानक मंजर को याद कर आज भी उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
अस्पताल में भर्ती एक यात्री ने बताया कि उन्हें इस हादसे के बाद खुद को संभालना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा, “हम सिर्फ कुछ घंटों का सफर तय कर रहे थे, लेकिन इस सफर ने हमारी जिंदगी बदल दी। अब हर दिन उस दर्दनाक पल की यादें हमें सताती हैं।”
घायलों के परिजनों का भी बुरा हाल है, जो अस्पतालों में अपनों की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। हादसे ने उन परिवारों को अपार दुःख में डाल दिया है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।
यह हादसा राज्य में सड़क सुरक्षा के मुद्दों को उजागर करता है और प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

Author: Suryodaya Samachar
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