Ahemadabad News :- गुजरात में बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गणित के शिक्षकों द्वारा नंबर जोड़ने में हुई गलतियों के कारण शिक्षा विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। पुनर्मूल्यांकन के दौरान कई उत्तर पुस्तिकाओं में गणना संबंधी त्रुटियाँ सामने आईं, जिससे प्रभावित छात्रों के परिणाम गलत घोषित हो गए थे। इसके परिणामस्वरूप, शिक्षा विभाग ने उन शिक्षकों पर जुर्माना लगाया और उनसे लाखों रुपये की वसूली की गई।
हर नंबर कीमती होता है, लेकिन बोर्ड परीक्षा में नंबर जोड़ने में गणित के शिक्षक से ही गलती हो गई। शिक्षा विभाग ने भारी जुर्माना लगाया है। दसवीं कक्षा की परीक्षा में एक विषय में 30 नंबर कम आने के बाद एक छात्र की शिकायत पर जांच के बाद गुजरात राज्य शिक्षा विभाग ने गलती करने वाले शिक्षकों पर जुर्माना लगाया।
गणित के शिक्षकों ने तीस नंबर जोड़ने में की गलती
पुनर्मूल्यांकन में पता चला कि गणित के शिक्षक ने तीस नंबर जोड़ने में गलती की थी। इस साल बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गलती करने वाले 4488 शिक्षकों पर शिक्षा विभाग ने जुर्माना लगाया है। 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में शिक्षकों से नंबर जोड़ने में बड़ी गलतियाँ हुईं। शिक्षकों से शिक्षा विभाग ने 64 लाख रुपये का जुर्माना वसूला।
गुजरात शिक्षा विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई ने शिक्षा प्रणाली में मूल्यांकन प्रक्रिया की गंभीरता को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, दसवीं और बारहवीं कक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गणित और विज्ञान के शिक्षकों द्वारा की गई गलतियाँ विशेष रूप से चिंता का विषय हैं, क्योंकि यह विषय आगे की पढ़ाई और करियर के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
सौ से अधिक गणित के शिक्षकों द्वारा नंबर जोड़ने में की गई गलतियों ने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है, क्योंकि यह शिक्षकों की दक्षता और उत्तरदायित्व पर सवाल खड़े करता है। राष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट है कि जुर्माने के बाद छात्रों में पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे शिक्षा विभाग पर भी दबाव बढ़ा है कि वह मूल्यांकन प्रक्रिया को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए।
तथ्यों के अनुसार:
दसवीं कक्षा में 1654 शिक्षकों से 20 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।
12वीं कक्षा के सामान्य विषयों में 1404 शिक्षकों से 24.31 लाख रुपये का जुर्माना लिया गया।
विज्ञान विषयों में 1430 शिक्षकों से 19.66 लाख रुपये वसूले गए।
शिक्षा विभाग की यह पहल छात्रों के हित में की गई है, जिससे भविष्य में मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जा सके।यह कदम छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में और अधिक सावधानी बरती जा सके। विभाग का उद्देश्य है कि भविष्य में ऐसी गलतियों से बचा जा सके और परीक्षा परिणाम सही ढंग से घोषित किए जा सकें।
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Author: Suryodaya Samachar
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