Savan Vinayak chaturthi 2024 : सावन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। बस तो हर मास की चतुर्थी का बड़ा महत्व है लेकिन सावन में पड़ने से इसका और महत्व बढ़ जाता है इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
विघ्नहर्ता गणेश की पूजा क्यों है ज़रूरी
सावन में पढ़ने वाली विनायक चतुर्थी का विशेष महत्व है, कहा जाता है सावन की पवित्र माह में बिना विनायक चतुर्थी व्रत और पूजा श्री चौगुले फल की प्राप्ति होती है, गणेश जी हमारे जीवन में आ रहे सारे विघ्नों को हर लेते हैं, गणेश जी की पूजा अर्चना करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। साथ ही हर कार्य में सफलता के योग बनते हैं। हमारे पुराणों के अनुसार गणेश जी को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है , है काम को शुरू करने से पहले उनका आह्वान किया जाता है । उनकी पूजा विधिविधान से करने से हमारे जीवन में सरस्वती और लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
क्या है शुभ मुहूर्त ?
सावन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 7 अगस्त को रात 10: 05 मिनट से होगी। सावन मास की विनायक चतुर्थी 8 अगस्त को है, पूजा का मुहूर्त प्रातः 11: 07 मिनट से दोपहर 1:46 मिनट तक है ।
चढ़ाएं किस रंग पुष्प एवम् पूजा विधि
सावन मास की चतुर्थी को सबसे पहले सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठे स्नान करने की पश्चात एक चौकी के ऊपर लाल या पीला कपड़ा बिछाए गणेश जी को गुलाब का फूल और दुर्गा जरूर अर्पण करें, धूप दीप दिखाएं इस दिन भगवान सूर्य नारायण जी के सूर्याष्टक का गणेश जी के सामने 3 बार पाठ करने से गणेश जी हमारे जीवन की सारी बाधाओं को हर लेते हैं, भोग लगाएं फिर आरती करें और भूल चूक की क्षमा मांग लें।

गणेश जी के मंत्र
– वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
2 – ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥
3-ऊँ गं गणपतये नमो नमः
4-ॐ गं गणपतये नमः
5- “ॐ वक्रतुंडाय हुम्”
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Author: Suryodaya Samachar
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