Amardeep throwball player :- देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को अक्सर खेल के मैदान पर उनके शानदार प्रदर्शन के लिए सम्मान मिलता है। मंच पर तिरंगा लहराते समय उनकी उपलब्धियों पर पूरा देश गर्व करता है, लेकिन कई बार प्रतियोगिता खत्म होने के बाद यही खिलाड़ी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में संघर्ष करते नजर आते हैं। झारखंड के 29 वर्षीय थ्रो-बॉल खिलाड़ी अमरदीप की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए चार गोल्ड मेडल जीते हैं। इसके बावजूद आज वह सरकारी नौकरी के इंतजार में अपनी आजीविका चलाने के लिए रांची की सड़कों पर मेहनत कर रहे हैं।
अमरदीप की वर्तमान जिंदगी खेल मैदान की चमक-दमक से बिल्कुल अलग है। परिवार की जरूरतों और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए वह रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जियां बेचते हैं और साथ ही कैब भी चलाते हैं। एक तरफ उनके पास देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने का गौरव है, तो दूसरी तरफ आर्थिक मजबूरियों ने उन्हें ऐसे काम करने पर मजबूर कर दिया है, जिनसे उनका परिवार चल सके।
Amardeep throwball player :- चार बार देश का नाम रोशन किया, फिर भी नौकरी का इंतजार
अमरदीप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर थ्रो-बॉल में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए चार गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं। किसी भी खिलाड़ी के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करना और फिर स्वर्ण पदक जीतकर लौटना बड़ी उपलब्धि होती है। लेकिन अमरदीप के मामले में इन उपलब्धियों के बावजूद सरकारी नौकरी का सपना अब तक पूरा नहीं हुआ है।
अमरदीप के मुताबिक, वह 2016 से प्रोत्साहन राशि पाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके बाद 2020 से सरकारी नौकरी के लिए भी लगातार कोशिश कर रहे हैं। वर्षों बीत जाने के बाद भी जब उन्हें नौकरी नहीं मिली तो आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें दूसरे कामों का सहारा लेना पड़ा।
यह स्थिति सिर्फ एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत परेशानी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को खेल के बाद स्थायी आजीविका के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
Amardeep throwball player :- अरगोड़ा चौक पर सब्जियां बेचते हैं अमरदीप
रांची का अरगोड़ा चौक इन दिनों अमरदीप के संघर्ष का गवाह है। जिस खिलाड़ी ने कभी अंतरराष्ट्रीय मैदान पर भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता, वही अब यहां सब्जियां बेचकर अपने परिवार का खर्च निकालने की कोशिश करता है।
सब्जी बेचने का काम उनके लिए केवल रोजगार नहीं, बल्कि परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने का जरिया है। खेल में करियर बनाने का सपना देखने वाले किसी खिलाड़ी के लिए यह बदलाव आसान नहीं माना जा सकता। लेकिन आर्थिक जरूरतों के सामने उन्हें यह रास्ता अपनाना पड़ा।
अमरदीप यहीं नहीं रुकते। अपनी आय को सहारा देने के लिए वह कैब भी चलाते हैं। यानी दिन का एक हिस्सा सब्जी बेचने में और दूसरा हिस्सा कैब चलाने में गुजरता है। उनके सामने खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने और परिवार की जरूरतें पूरी करने के बीच एक कठिन संतुलन बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए लेना पड़ा कर्ज
अमरदीप की कहानी का एक और पहलू बेहद महत्वपूर्ण है। देश के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का सपना पूरा करने के लिए उन्हें कई बार कर्ज तक लेना पड़ा।
उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए आर्थिक मदद का अभाव इतना गंभीर रहा कि उन्हें प्रतियोगिताओं में जाने के लिए उधार लेना पड़ा। मलेशिया जाने के लिए भी उन्होंने 65 हजार रुपये का कर्ज लिया था।
यह सवाल अपने आप में बड़ा है कि जिस खिलाड़ी से देश के लिए पदक जीतने की उम्मीद की जाती है, उसे अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने के लिए अपनी जेब और कर्ज पर निर्भर क्यों होना पड़ता है?
खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता केवल मैदान पर प्रदर्शन का मौका नहीं होती। इसके पीछे यात्रा, प्रशिक्षण, उपकरण और अन्य खर्च जुड़े होते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ी के लिए इन खर्चों का इंतजाम करना किसी चुनौती से कम नहीं होता। अमरदीप का अनुभव इसी संघर्ष की ओर इशारा करता है।
Amardeep throwball player :-पदक जीतने के बाद भी संघर्ष खत्म नहीं हुआ
आमतौर पर किसी खिलाड़ी के लिए अंतरराष्ट्रीय पदक बड़ी उपलब्धि माना जाता है। उम्मीद होती है कि उसकी सफलता के बाद उसे प्रोत्साहन मिलेगा और भविष्य के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। लेकिन अमरदीप की कहानी में पदक जीतने के बाद भी संघर्ष खत्म नहीं हुआ।
Mirzapur News :- आकाशीय बिजली गिरने से पांच ट्रांसफार्मर जले, सैकड़ों घरों की बिजली गुल
उन्होंने 2016 से प्रोत्साहन राशि और 2020 से नौकरी के लिए प्रयास जारी रखने की बात कही है। इतने लंबे समय तक इंतजार के बावजूद जब स्थायी रोजगार का रास्ता नहीं खुला तो उन्होंने खुद रोजगार के विकल्प तलाशे।
उनकी स्थिति यह सोचने पर मजबूर करती है कि खेल प्रतिभाओं को केवल प्रतियोगिता के दौरान समर्थन देना पर्याप्त है या उनके खेल करियर के बाद की आर्थिक सुरक्षा पर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
Amardeep throwball player :-अमरदीप की कहानी सिर्फ नौकरी की मांग नहीं
अमरदीप की कहानी को केवल सरकारी नौकरी पाने की कोशिश के तौर पर देखना शायद इस पूरे मामले की गंभीरता को कम कर देगा। यह उन तमाम खिलाड़ियों की ओर ध्यान खींचती है जो खेल में अपना समय, मेहनत और पैसा लगाकर देश के लिए उपलब्धियां हासिल करते हैं, लेकिन बाद में रोजगार और आर्थिक सुरक्षा के लिए संघर्ष करते हैं।
एक खिलाड़ी के लिए पदक केवल धातु का टुकड़ा नहीं होता। उसके पीछे वर्षों का अभ्यास, परिवार का सहयोग, यात्रा, प्रतियोगिताएं और कई तरह के त्याग छिपे होते हैं। ऐसे में जब कोई अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ी अपनी आजीविका के लिए सब्जियां बेचता और कैब चलाता दिखाई देता है, तो यह तस्वीर समाज और खेल व्यवस्था दोनों के लिए विचार करने का विषय बन जाती है।

Amardeep throwball player :- सरकार से उम्मीद, कब मिलेगा हक?
अमरदीप वर्षों से जिस सरकारी नौकरी और प्रोत्साहन राशि की उम्मीद कर रहे हैं, वह अब उनके लिए सिर्फ एक सुविधा नहीं बल्कि उनके भविष्य और परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा सवाल बन चुका है।
चार अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल जीतने वाले इस खिलाड़ी की कहानी अब इस उम्मीद के साथ सामने आती है कि संबंधित विभाग और सरकार उनकी उपलब्धियों और वर्षों से किए जा रहे प्रयासों पर ध्यान देंगे। जरूरत इस बात की है कि उनके मामले की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की जाए और यदि वह निर्धारित पात्रता पूरी करते हैं तो उन्हें नियमानुसार मिलने वाले लाभ और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
अमरदीप ने अंतरराष्ट्रीय मैदान पर देश के लिए अपना योगदान दिया है। अब सवाल यह है कि क्या व्यवस्था उनके संघर्ष को पहचानकर उन्हें वह सम्मान और अवसर देगी, जिसके वह हकदार हैं?
हमारा दूसरा न्यूज़ चैनल :- unnao news
Author: Suryodaya Samachar
खबर से पहले आप तक






