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Nagpanchami 2025 : नागपंचमी पर बन रहा रवि योग, जानें क्या है महत्व , व्रत कथा और आरती

Nagpanchami 2025 :- हिंदू धर्म का एक पावन पर्व है जो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन नाग देवताओं की पूजा की जाती है और भगवान शिव को दूध अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से काल सर्प दोष समाप्त होता है और जीवन में सुख-शांति आती है।

 

🗓️ नाग पंचमी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

तिथि: सोमवार, 4 अगस्त 2025

पंचमी तिथि प्रारंभ: 4 अगस्त 2025 को प्रातः 05:17 बजे

पंचमी तिथि समाप्त: 5 अगस्त 2025 को प्रातः 07:12 बजे

पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:15 बजे से 08:45 बजे तक (रवि योग में पूजा अत्यंत फलदायक मानी गई है)

🙏 नाग पंचमी पूजा विधि (Puja Vidhi)

1. प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. घर के आंगन या मंदिर में नाग देवता की तस्वीर या मिट्टी से नाग बनाएँ।

3. कलश की स्थापना करें और उसमें गंगा जल भरें।

4. नाग देवता की प्रतिमा पर हल्दी, रोली, चावल, फूल, कुश, दूर्वा, चंदन चढ़ाएँ।

5. दूध, दही, शहद और घी का पंचामृत बनाकर अर्पित करें।

6. नाग पंचमी व्रत कथा का पाठ करें।

7. अंत में आरती करके प्रसाद वितरित करें।

 

📜 नाग पंचमी व्रत कथा (Vrat Katha संक्षेप में)

प्राचीन कथा के अनुसार एक किसान के सात पुत्र थे। एक दिन उसकी बहू ने गलती से नाग के बच्चों को दूध में खौलाकर मार डाला। क्रोधित नाग ने बदले में किसान के सारे पुत्रों को डस लिया। बाद में बहू ने पश्चाताप करते हुए नाग पंचमी के दिन व्रत और पूजा की, जिससे नाग देवता प्रसन्न हुए और मृत पुत्रों को जीवनदान दिया।

 

🪔 नाग देवता की आरती

🔸 आरती श्री नाग देव की, करता जो जन प्रीति।
🔸 भक्ति भाव से जो भी गाए, पावे पूर्ण सिद्धि।
🔸 दूर्वा, दूध, चावल, जल से, होवे मनोकामना पूर्ण।
🔸 आरती श्री नाग देव की, जय-जय कार सदा गूँजे।

 

📿 नाग पंचमी मंत्र (Mantra)

🔹 ॐ नमः शिवाय
🔹 ॐ कुरुकुल्ये हुं फट स्वाहा
🔹 ॐ सर्पाय नमः
🔹 अनन्तं वासुकीं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शंखपालं धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥

 

🪶 पूजा सामग्री (Samagri List)

नाग देव की प्रतिमा या चित्र

दूध, दही, घी, शहद (पंचामृत हेतु)

चावल, हल्दी, कुमकुम

फूल, दूर्वा, कुशा

जल से भरा कलश

मिठाई, फल और प्रसाद

दीपक, धूप, आरती की थाली

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🔮 विशेष मान्यता

इस दिन नाग देव की पूजा के साथ-साथ भगवान शिव की आराधना भी अति फलदायक मानी जाती है। शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से सभी प्रकार के दोष शांत होते हैं, विशेषकर काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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