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Mirzapur news:- ओड़ी गांव में पुल बना भ्रष्टाचार की मिसाल, पहली बारिश में उजागर हुआ हकीकत का पुल

Mirzapur news :- बरसात आई और सच सामने आ गया। यह कोई कहावत नहीं, बल्कि जमालपुर ब्लॉक के ओड़ी गांव की हकीकत है। सिंचाई एवं जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के पैतृक गांव में गरई नाले पर बनाया जा रहा पुल भ्रष्टाचार की पहली झलक में ही सवालों के घेरे में आ गया है।

दरअसल, कुछ ही समय पहले लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा पुराने मजबूत पुल को तोड़कर नया पुल बनवाया जा रहा है। निर्माण कार्य की शुरुआत मई में की गई, जबकि मानसून के आगमन की आहट उस समय साफ सुनाई देने लगी थी। बावजूद इसके नाले के तेज बहाव को ध्यान में रखे बिना अस्थायी डायवर्जन बना दिया गया, जो पहली ही बारिश में बह गया।

अब क्या स्थिति है?

गांव दो हिस्सों में बंट गया है। किसानों को अपने ही खेतों तक पहुंचने के लिए तीन किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। ओड़ी गांव के साथ-साथ लोढ़वा, भभौरा, देवरिल्ला, गुलौरी और मनई जैसे कई गांव प्रभावित हो चुके हैं। आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन विभागीय अधिकारी अब तक चुप्पी साधे हुए हैं।

पुराना पुल था मजबूत… फिर क्यों तोड़ा गया?

स्थानीय लोगों के अनुसार, पुराना पुल वर्षों से मजबूती से खड़ा था। बरसात और बाढ़ में भी आवाजाही में कोई दिक्कत नहीं होती थी। बाइक, साइकिल और कारें आसानी से पार हो जाती थीं। ऐसे में सवाल उठता है कि उस पुल को आखिर क्यों तोड़ा गया? क्या यह जनता की जरूरत थी या किसी ‘विशेष स्वार्थ’ की पूर्ति?

लागत और लापरवाही का रिश्ता

बताया जा रहा है कि नए पुल पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन जिस तरह से निर्माण की शुरुआत की गई और बारिश के प्रभाव की अनदेखी की गई, उससे ये सवाल उठना लाज़मी है कि क्या यह परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है?

जनता पूछ रही है सवाल

ग्रामीणों में नाराजगी साफ है। उनका कहना है कि मंत्री जी के नाम पर काम हो रहा है, लेकिन उनकी ही पंचायत की जनता भुगत रही है। गांव के बुजुर्ग रामधनी कहते हैं, “यह पुल तो लोगों की सुविधा के लिए नहीं, दिखावे और कमीशनखोरी के लिए बन रहा है।”

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अगर योजनाएं ज़मीन की हकीकत को नजरअंदाज कर सिर्फ फाइलों और फोटो खिंचवाने के लिए बनाई जाएं, तो उनका हश्र इसी तरह होगा। पहली बारिश में ही जो पुल ढह जाए, वो भ्रष्टाचार की गहराई को बताने के लिए काफी है।

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Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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