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Varanasi News :- एक देश, एक बोर्ड” की मांग को लेकर वाराणसी में ज्ञापन, हनुमान चालीसा के 108 पाठ के बाद सौंपा गया ज्ञापन

Varanasi News :- देश में शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण और इससे उत्पन्न सामाजिक असमानताओं के खिलाफ धरोहर संरक्षण सेवा संगठन के “केसरिया भारत” आयाम के तत्वावधान में वाराणसी में एक जोरदार अभियान चलाया गया। संगठन के प्रमुख संयोजक कृष्णानन्द पाण्डेय के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने 108 बार श्री हनुमान चालीसा पाठ कर महंगी शिक्षा के विरुद्ध अपनी आस्था व संकल्प को प्रकट किया और इसके उपरांत माननीय प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया।

सभा में उठी एक क्रांतिकारी मांग — “एक देश, एक बोर्ड, एक फीस, एक पाठ्यक्रम”

जिलाधिकारी कार्यालय के पोर्टिको में आयोजित जनसभा में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली अब आर्थिक असमानता का कारण बन चुकी है। सभा में श्री कृष्णानन्द पाण्डेय ने कहा—

> “आज शिक्षा सेवा नहीं, व्यवसाय बन गई है। एक ही देश में अनेक बोर्ड, अनेक पाठ्यक्रम और अलग-अलग फीस ढांचे ने समाज को विभाजित कर दिया है। श्रीकृष्ण और सुदामा अब एक ही विद्यालय में नहीं रह पा रहे।”

महंगी शिक्षा से पारिवारिक और सामाजिक विघटन की चिंता

उन्होंने यह भी कहा कि—

> “जब एक ही परिवार में दो भाई अपने बच्चों को अलग-अलग स्कूलों में पढ़ाने को विवश होते हैं, तो आपसी खटास, तनाव और विघटन की शुरुआत यहीं से होती है। महंगी शिक्षा आज सामाजिक समरसता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है।”

 

गौरीश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि—

> “महंगे निजी स्कूलों की फीस और दाखिला प्रक्रिया ने गांवों की प्रतिभाओं को पलायन के लिए मजबूर कर दिया है। वहीं सरकारी स्कूलों की उपेक्षा कर उन्हें बंद किया जा रहा है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच दोनों पर संकट है।”

 

सरल समाधान – समान शिक्षा सबके लिए

सारिका दूबे ने समाधान की ओर इशारा करते हुए कहा—

> “एक देश, एक बोर्ड, एक फीस, एक पाठ्यक्रम – यह कोई जुमला नहीं, बल्कि समानता, सुलभता और राष्ट्रीय एकता का आधार है।”

 

अविनाश आनंद ने कहा—

> “यदि सभी बच्चों को एक जैसा पाठ्यक्रम, एक जैसी परीक्षा और प्रमाणपत्र मिलें तो समाज में समानता स्वतः स्थापित होगी। भारतीय संस्कृति, भाषा और नैतिक मूल्यों को आधार बनाकर शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का माध्यम बनाया जा सकता है।”

 

गौरव मिश्र ने कहा—

> “यदि 10वीं तक सभी विद्यालयों में समान फीस और पाठ्यक्रम लागू हो जाएं तो सरकारी स्कूलों में लोगों की रुचि बढ़ेगी, निजीकरण रुकेगा और शिक्षा पुनः जनसेवा का माध्यम बनेगी।”

 

ज्ञापन की प्रमुख मांगें:

पूरे देश में एक समान शिक्षा बोर्ड लागू हो

सभी स्कूलों में एक जैसे पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रणाली हो

फीस का एक समान और पारदर्शी ढांचा बनाया जाए

शिक्षा को व्यापार नहीं, सेवा के रूप में परिभाषित किया जाए

सैकड़ों कार्यकर्ताओं की भागीदारी

इस जनजागरण अभियान में प्रमुख रूप से सतीश पाण्डेय, उपेंद्र सिंह, रमाकान्त पाण्डेय, प्रियंवदा मिश्र, हरीशचन्द्र चौबे, चंद्रदेव पटेल, अजय मिश्र, विनोद वेणवंशी, अमित सिंह, विपिन सिंह, सोनू गोंड, पंचम गुप्ता, विनीत दुबे, शुभम् पाण्डेय समेत सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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