Varanasi News :- धरोहर संरक्षण सेवा संगठन की “संस्कृति संवाद यात्रा” का 39वां पड़ाव वाराणसी के सथवा में संपन्न सनातन संस्कृति और भारतीय जीवन पद्धति के संरक्षण व विस्तार के उद्देश्य से “धरोहर संरक्षण सेवा संगठन” द्वारा संचालित “संस्कृति संवाद यात्रा” का 39वां पड़ाव रविवार को जी.के.जी. पब्लिक स्कूल, सथवा, वाराणसी में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात कथावाचक सुधीरानंद जी ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में संगठन के प्रमुख संयोजक कृष्णा नन्द पाण्डेय ने सभा को संबोधित किया।
🔹 सनातन की जाति व्यवस्था = रोजगार की गारंटी
कृष्णा नन्द पाण्डेय ने कहा,
> “दुनिया का कोई संविधान हर नागरिक को रोजगार की गारंटी नहीं दे सकता, लेकिन सनातन का संविधान अपने एक-एक अनुयायी को रोजगार देने की व्यवस्था करता है—वर्तमान में भी और आने वाले हजार वर्षों तक भी। यही सनातन की जाति व्यवस्था की विशेषता है।”
उन्होंने कहा कि जो जातियाँ अपने पारंपरिक आजीविका से हट गईं, वे कमजोर हो गईं और उनके कार्यक्षेत्र पर बाहरी लोगों ने कब्जा कर लिया। इसलिए जिन्होंने अपनी जातिगत आजीविका को त्यागा, वे केवल आजीविका ही नहीं, अपनी पहचान भी खो बैठे।
🔹 संस्कृति और आजीविका का संबंध
विंध्यवासिनी पाण्डेय ने कहा,
> “जिन सभ्यताओं ने अपनी संस्कृति और आजीविका की रक्षा नहीं की, उनकी धरोहर मिट गई। आज हर सनातनी को अपने आजीविका क्षेत्र में पारंगत होना होगा, तभी मानवता और सनातन की रक्षा संभव है।”

डा. चन्द्रदेव पटेल ने भी विचार रखते हुए कहा कि यह समय चेतने का है। हर सनातनी को अपनी पारंपरिक आजीविका की ओर लौटना होगा और उसे मजबूत बनाना होगा, तभी भारत की सनातन संस्कृति दीर्घकाल तक जीवित रह सकेगी।
🔹 उल्लेखनीय उपस्थिति और समापन
इस विचार गोष्ठी में राजन मिश्र, सोनू गोंड, रमाकांत पाण्डेय, राजेश मिश्र, प्रदीप पाण्डेय, विनोद वेनवंशी, आनंद पाण्डेय, अविनाश आनंद, रामवली पटेल सहित दर्जनों गणमान्य जन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का आयोजन शुभम पाण्डेय द्वारा किया गया, जबकि गौरव मिश्र ने कुशल संचालन किया।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक श्री हनुमान चालीसा पाठ के साथ हुआ।
Author: Suryodaya Samachar
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