Zeeshan Siddiqui:- जीशान सिद्दीकी, जिनके पिता बाबा सिद्दीकी हाल ही में मुंबई के बांद्रा क्षेत्र में गोलीबारी में मारे गए, एक बार फिर से विधानसभा चुनाव में चुनावी मैदान में हैं। अजित पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी गुट ने उन्हें 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए बांद्रा ईस्ट सीट से उम्मीदवार बनाया है। जीशान, जो पहले कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं, अब एनसीपी के टिकट पर इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
पृष्ठभूमि और राजनीतिक करियर
जीशान सिद्दीकी का राजनीतिक सफर 2019 में शुरू हुआ, जब उन्होंने पहली बार बांद्रा ईस्ट सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते। वह मुंबई यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और अपनी सक्रियता और युवाओं में प्रभाव के चलते कांग्रेस में एक उभरते हुए नेता के रूप में जाने जाते थे। उनके पिता, बाबा सिद्दीकी, जो राज्य के पूर्व मंत्री रह चुके हैं, मुंबई की राजनीति में एक प्रभावशाली नाम थे। हालाँकि, कुछ माह पूर्व कांग्रेस ने जीशान को पार्टी से निष्कासित कर दिया, जिसके बाद उन्होंने अजित पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी गुट का दामन थाम लिया।
हाल की घटना: बाबा सिद्दीकी की हत्या
जीशान के पिता बाबा सिद्दीकी की हाल ही में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिससे मुंबई की राजनीति में हलचल मच गई। बाबा सिद्दीकी की हत्या के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के शूटरों का नाम सामने आ रहा है, और इस मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है। इस दुखद घटना के बाद, जीशान और उनका परिवार गहरे सदमे में हैं, लेकिन उन्होंने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का निर्णय किया है।
एनसीपी से टिकट और चुनावी रणनीति :Zeeshan Siddiqui
बाबा सिद्दीकी की मौत के बाद एनसीपी ने जीशान पर भरोसा जताते हुए उन्हें बांद्रा ईस्ट सीट से उम्मीदवार घोषित किया। इस सीट से उनकी उम्मीदवारी एनसीपी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि बांद्रा ईस्ट में सिद्दीकी परिवार की मजबूत पकड़ मानी जाती है। जीशान ने एनसीपी से टिकट मिलने पर पार्टी के सभी नेताओं का आभार जताया और कहा कि यह उनके और उनके परिवार के लिए एक भावनात्मक क्षण है। उन्होंने कहा कि वह अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं और इस चुनाव में जीत हासिल करना चाहते हैं।
पिछले चुनावों का परिणाम और जीशान की जीत
2019 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जीशान ने कांग्रेस के टिकट पर बांद्रा ईस्ट सीट से चुनाव लड़ा था। उस समय उन्होंने शिवसेना के उम्मीदवार प्रिंस महादेश्वर को 5,790 वोटों के अंतर से हराया था। जीशान को 38,337 वोट मिले थे जबकि शिवसेना के प्रिंस महादेश्वर को 32,547 वोट प्राप्त हुए थे। तृप्ति सावंत, जो निर्दलीय उम्मीदवार थीं, उन्हें 24,071 वोट मिले। इस जीत ने जीशान को बांद्रा ईस्ट क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नेता बना दिया, और उनके प्रभाव के चलते इस बार एनसीपी ने उन्हें फिर से बांद्रा ईस्ट से ही मैदान में उतारा है।
जीशान का आत्मविश्वास और चुनावी दृष्टिकोण
जीशान सिद्दीकी ने अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद कहा कि यह उनके लिए एक भावनात्मक क्षण है और उन्हें अपने समर्थकों के प्यार और समर्थन से इस बार भी जीत का पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में वह अपने पिता की विरासत को जीवित रखने के लिए पूरी मेहनत करेंगे और बांद्रा ईस्ट की जनता के लिए विकास और सेवा में समर्पित रहेंगे। जीशान का कहना है कि उन्हें विश्वास है कि बांद्रा ईस्ट की जनता एक बार फिर से उन पर भरोसा करेगी और उन्हें भारी समर्थन देगी।
एनसीपी के लिए बांद्रा ईस्ट सीट की अहमियत
एनसीपी के लिए बांद्रा ईस्ट सीट इस बार काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मुंबई की महत्वपूर्ण सीटों में से एक है। अजित पवार गुट ने जीशान को इस सीट से उम्मीदवार बनाकर एक रणनीतिक कदम उठाया है। जीशान का परिवार और उनका नाम क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखते हैं, और इससे एनसीपी को बांद्रा ईस्ट में बढ़त मिल सकती है। इसके अलावा, बाबा सिद्दीकी की मौत के बाद जनता में सहानुभूति की लहर भी जीशान के पक्ष में काम कर सकती है।
चुनाव में संभावित चुनौतियाँ
हालाँकि, बांद्रा ईस्ट में जीतना आसान नहीं होगा क्योंकि क्षेत्र में अन्य पार्टियों के उम्मीदवार भी मजबूत माने जा रहे हैं। शिवसेना, जो पिछले चुनाव में जीशान के खिलाफ खड़ी थी, इस बार भी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा, निर्दलीय और अन्य पार्टी के उम्मीदवारों के साथ-साथ कांग्रेस से निष्कासित किए जाने का असर भी जीशान के चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है। इसके बावजूद, एनसीपी के साथ होने के कारण उन्हें नए गठबंधन और समर्थन का लाभ मिल सकता है।
जीशान सिद्दीकी के लिए यह चुनाव न केवल उनके राजनीतिक करियर के लिए, बल्कि अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण है। उनकी उम्मीदवारी से एनसीपी को बांद्रा ईस्ट सीट में एक मजबूत दावेदारी मिली है। उनके आत्मविश्वास और समर्थकों के समर्थन से उन्हें इस चुनाव में अच्छी संभावना दिखाई दे रही है। अब देखना होगा कि जीशान इस चुनाव में अपने पिता की विरासत को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और जनता का भरोसा जीतने में कितने सफल होते हैं।

Author: Suryodaya Samachar
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