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Tirupati Laddu Row:–तिरुपति में बीफ वाले लड्डू खा चुके हिंदुओ को शुद्ध करने का संतो ने बताया फार्मूला….

Tirupati Laddu Row:– तिरुपति लड्डू को लेकर हुए विवाद में एक नया पहलू सामने आया है, जिसे लेकर साधु-संतों ने अपनी राय दी है। मामला तब शुरू हुआ जब यह दावा किया गया कि कुछ श्रद्धालुओं को ‘बीफ से संबंधित’ सामग्री के साथ लड्डू परोसे गए थे। इससे हिंदू समुदाय में काफी नाराजगी फैली और धार्मिक शुद्धि के उपायों पर चर्चा शुरू हो गई।

साधु-संतों का कहना है कि जो लोग इस तरह की स्थिति में लड्डू खा चुके हैं, उनके लिए ‘शुद्धिकरण’ का एक खास तरीका है। इसके तहत उन्होंने बताया कि गोमूत्र (गाय का मूत्र) पीने से धार्मिक और शारीरिक शुद्धि की जा सकती है। गोमूत्र को धार्मिक रूप से पवित्र माना जाता है, और इसके सेवन से व्यक्ति को शुद्ध किया जा सकता है।

गोमूत्र का करें सेवन

संतों का यह भी कहना है कि गाय का मूत्र सनातन धर्म में हमेशाका से एक औषधि के रूप में प्रयोग होता आया है, और इसे पवित्रता और शुद्धिकरण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस संदर्भ में, गोमूत्र का सेवन करने के बाद व्यक्ति फिर से पूजा-अर्चना और धार्मिक कर्मकांड कर सकता है, जिससे उसकी शुद्धि हो जाएगी।यह विवाद अभी भी कई धार्मिक संगठनों और मंदिर प्रशासन के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। मंदिर प्रशासन ने इस मुद्दे की जांच कराने का आश्वासन दिया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

साधु संतों ने जताई नाराजगी

तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद में मिलावट को लेकर विवाद ने हिंदू श्रद्धालुओं में गहरी चिंता और नाराजगी पैदा कर दी है। इस मामले में साधु-संतों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

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परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने इस विषय पर बोलते हुए कहा कि जो हिंदू अनजाने में तिरुपति बालाजी मंदिर में मिलावटी प्रसाद ग्रहण कर चुके हैं, वे गंगाजल या गौमूत्र का सेवन कर अपने अपराधबोध से मुक्ति पा सकते हैं। उन्होंने कहा कि गंगाजल और गौमूत्र को सनातन धर्म में पवित्र और शुद्धिकरण का प्रतीक माना जाता है, और इनके सेवन से धार्मिक दृष्टिकोण से शुद्धि हो सकती है।

क्यों मचा हुआ है बवाल?

विवाद तब शुरू हुआ जब आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया कि पिछली वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार के दौरान तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद, विशेषकर लड्डुओं में जानवरों की चर्बी (बीफ टैलो) और मछली के तेल जैसी सामग्री मिलाई गई थी। उनके इस दावे को और मजबूती देते हुए, उनकी पार्टी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने एक लैब रिपोर्ट पेश की, जो गुजरात की एक प्रयोगशाला द्वारा की गई थी। रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि प्रसाद में मछली का तेल और बीफ टैलो मौजूद था।

हालांकि, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और इस मामले की जांच कराने की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके।यह मामला धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से बेहद संवेदनशील बन चुका है, और हिंदू समाज में इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

घी की शुद्धता की गारंटी ले मंदिर प्रशासन

परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि इस प्रकार का प्रसाद ही सभी मंदिरों में बांटा जाना चाहिए जब तक कि सरकार और मंदिरों का प्रबंधन प्रसाद में मिलाए जाने वाले घी की शुद्धता की गारंटी न ले।

उन्होंने कहा, “पारंपरिक रूप से इलायची दाना, मिश्री और सूखे मेवे ही हिंदु देवी देवताओं को भोग के रूप में चढ़ाए जाते हैं। भक्तों में उन्हें बांटे जाने से प्रसाद में मिलावट की कोई आशंका नहीं रहेगी।”

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Author: Suryodaya Samachar

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